जो समाज शिक्षा पर वोट नहीं देता, वह पीढ़ियों तक मजदूरी करता है। स्कूल बैग चुनाव चिन्हचुनाव चिन्ह — स्कूल बैग
सही लोग  •  सही सोच  •  सामूहिक प्रयास

बिहार के 8,400+ पंचायतों में व्यवस्था परिवर्तन की नई क्रांति

शुरुआत बिहार से — सवाल पूरे देश के भविष्य का।

70 वर्षों में जाति और धर्म के नाम पर वोट देकर हमने क्या पाया? अब वोट शिक्षा, रोज़गार और पलायन रोकने के नाम पर। यह सिर्फ़ चुनाव नहीं — यह व्यवस्था परिवर्तन का जन-आंदोलन है, जो अब उत्तर प्रदेश के गांवों तक पहुंच रहा है।

0पदयात्रा — गांव-गांव पैदल
0पंचायत, बिहार में लक्षित
0ज़िले — हर प्रखंड में टीम
0राज्य — बिहार से यूपी तक
आंदोलन का विज्ञान

4M ढांचा — क्रांति संयोग से नहीं, तंत्र से होती है

हर सफल जन-आंदोलन के चार स्तंभ: संदेशवाहक, संदेश, सिपाही और तंत्र। जन सुराज इन चारों को एक साथ खड़ा कर रहा है।

भरोसा संदेश पर नहीं, संदेशवाहक पर होता है

प्रशांत किशोर — जिन्होंने दो दशक दूसरों को सत्ता दिलाई, अब जनता के साथ पैदल खड़े हैं। लेकिन असली संदेशवाहक हर पंचायत का वह चेहरा है, जिस पर गांव पहले से भरोसा करता है।

  • पदयात्रा में परखे हुए स्थानीय नेता — भाषण से नहीं, ज़मीन से चुने गए
  • पंचायत-स्तर से ऊपर उठता नेतृत्व — कोई 'पैराशूट' उम्मीदवार नहीं
  • हर प्रखंड में नामज़द, जवाबदेह और सम्पर्क-योग्य चेहरा
  • कथनी-करनी एक: ₹10 करोड़ निजी सहयोग, हर संपत्ति व मामला शपथ-पत्र में सार्वजनिक
जन सुराज की जनसभा — यात्रा के मंच से जनता के बीच प्रशांत किशोर

तीन शब्द, जो हर दरवाज़े पर एक जैसे गूंजते हैं

संदेश वही टिकता है जो हर गांव के अपने दर्द से निकला हो। जन सुराज का पूरा घोषणापत्र तीन कसौटियों पर कसा जाता है:

शिक्षा

हर बच्चे को वही स्कूल मिले, जो अफ़सर के बच्चे को मिलता है। स्कूल की गुणवत्ता ही असली आरक्षण है।

रोज़गार

10–12 हज़ार की मजदूरी के लिए 1,500 किलोमीटर दूर क्यों? काम यहीं बनेगा — खेत से, हुनर से, उद्यम से।

पलायन रोको

पलायन नियति नहीं, नीति की विफलता है। जो राज्य मजदूर भेजता है, वह कभी मालिक नहीं बन पाता।

सरकारी स्कूल की कक्षा में पढ़ते बच्चे

क्रांति भाषण से नहीं, पांव से चलती है

3,000+ किलोमीटर की पदयात्रा से निकले प्रशिक्षित सिपाही — हर गांव में चौपाल, हर पंचायत में टीम। ये पोस्टर चिपकाने वाले कार्यकर्ता नहीं, व्यवस्था बदलने वाले मिशनरी हैं।

  • हर पंचायत में प्रशिक्षित समन्वयक — नाम, नंबर, ज़िम्मेदारी सार्वजनिक
  • चौपाल-संवाद: महीने में कम-से-कम एक बैठक, हर टोले तक
  • ऑफ़लाइन-सक्षम टूलकिट — नेटवर्क न भी हो, अभियान न रुके
गांव की सड़क पर लाठी लिए पैदल चलते लोग — पदयात्रा

पारदर्शी पैसा + पंचायत डेटा इंजन

आंदोलन जनता के पैसे से चलता है और जनता को ही हिसाब देता है। और नीति? वह दिल्ली में नहीं, गांव की रिपोर्ट से लिखी जाती है — हर जन-आवाज़ रिपोर्ट पंचायत प्रोफ़ाइल में जुड़ती है और नीति डेस्क तक पहुंचती है।

  • क्राउड-फंडिंग का लाइव बहीखाता — तिमाही सार्वजनिक फाइलिंग से मिलान
  • पंचायत डेटा इंजन: 8,400+ पंचायतों की समस्या-प्रोफ़ाइल, प्राथमिकता-क्रम में
  • हर रिपोर्ट को इंसान पढ़ता है — मशीन छांटती है, फ़ैसला टीम करती है
गांव की चौपाल — ज़मीनी रिपोर्ट यहीं से निकलती है
पंचायत मैचमेकर

अपना पिन कोड डालिए — अपने पंचायत का साथी खोजिए

पिन कोड, ज़िला या प्रखंड लिखते ही आपके इलाके का समन्वयक सामने। कोई फ़ॉर्म नहीं, कोई इंतज़ार नहीं।

यहाँ अभी कोई समन्वयक नहीं — पहला सिपाही आप बनिए

आपके पंचायत में जन सुराज की टीम अभी बन रही है। अपना नाम दीजिए — प्रखंड टीम 48 घंटे में संपर्क करेगी।

स्वयंसेवक के रूप में जुड़ें →

⚠ यह डिज़ाइन-प्रोटोटाइप है — सभी समन्वयक नाम, फ़ोटो व नंबर नमूना (सैंपल) डेटा हैं। लाइव संस्करण में यह सूची केंद्रीय CRM से जुड़ेगी।

ग्रासरूट्स डेटा पाइपलाइन

जन-आवाज़ — आपके गांव की समस्या, सीधे नीति टीम तक

यह शिकायत-पेटी नहीं है। हर रिपोर्ट एक इंसान पढ़ता है, पंचायत प्रोफ़ाइल में दर्ज होती है, और घोषणापत्र की प्राथमिकता तय करती है।

1
सिपाही दर्ज करता है

खेत की मेड़ पर खड़े-खड़े, मोबाइल से 2 मिनट में — फ़ोटो और जगह के साथ।

2
प्रखंड टीम सत्यापित करती है

हर रिपोर्ट को इंसान जांचता है — अफ़वाह छंटती है, तथ्य आगे बढ़ता है।

3
पंचायत प्रोफ़ाइल में जुड़ती है

8,400+ पंचायतों का जीवित नक्शा — कौन-सी समस्या कहाँ, कितनी बार।

4
नीति डेस्क तक पहुंचती है

घोषणापत्र गांव की रिपोर्ट से लिखा जाता है — दिल्ली के सम्मेलन-कक्ष से नहीं।

📱 अपने गांव की बात दर्ज कीजिए

आपकी बात दर्ज हो गई

प्रखंड टीम सत्यापन के बाद इसे आपकी पंचायत प्रोफ़ाइल में जोड़ेगी। यह रसीद संभाल कर रखिए:

JS-0000

(प्रोटोटाइप — यह फ़ॉर्म अभी किसी सर्वर से नहीं जुड़ा है)

पारदर्शी फंडिंग बहीखाता

चंदा नहीं, हिस्सेदारी — और एक-एक रुपये का सार्वजनिक हिसाब

जन सुराज जनता के पैसे से चलता है, इसलिए हिसाब भी जनता को ही देता है। यह कसौटी संस्थापक ने पहले खुद पर लागू की — चुनावी शपथ-पत्र में एक-एक रुपया, एक-एक संपत्ति घोषित।

कुल जन-सहयोग नमूना डेटा ₹4,85,20,510

प्रामाणिक आंकड़े — चुनावी शपथ-पत्र से ✓ सत्यापित स्रोत

  • ₹10 करोड़प्रशांत किशोर का अपनी कमाई से पार्टी को निजी सहयोग — आयकर रिटर्न FY 2024-25 में दर्ज (धारा 80GGC)
  • ₹85 करोड़परिवार-नियंत्रित वेधस वेंचर्स प्रा. लि. से पार्टी को घोषित सहयोग (FY 2024-25)
  • हर टैक्स चुकता5 वर्षों में ₹4.45 करोड़ आयकर व ₹5.58 करोड़ GST भुगतान — शून्य सरकारी बकाया
  • सब कुछ सार्वजनिकहर संपत्ति, देनदारी और लंबित मामला शपथ में घोषित — नाम पर कोई गाड़ी तक नहीं

स्रोत: फॉर्म-26 चुनावी शपथ-पत्र, 182-बांकीपुर (पटना), 13 जुलाई 2026 — पूरा शपथ-पत्र PDF पढ़ें

पैसा कहाँ जाता है नमूना

कुल व्यय का हिस्सा — हर मद पर प्रत्यक्ष लेबल, तिमाही फाइलिंग से मिलान

तिमाहीघोषित सहयोगफाइलिंग
Q1 FY27₹1.42 करोड़PDF (नमूना)
Q4 FY26₹1.18 करोड़PDF (नमूना)
Q3 FY26₹0.97 करोड़PDF (नमूना)
सार्वजनिक वचन: कोई गुमनाम बड़ा चंदा नहीं। हर तिमाही का ब्यौरा चुनाव आयोग की फाइलिंग से मिलान योग्य। जिस दिन हिसाब छिपे, उस दिन साथ छोड़ दीजिए।
₹100 से हिस्सेदारी शुरू करें नीति-पत्र (Whitepapers) पढ़ें
सिपाही टूलकिट

प्रचार का हथियार — आपकी जेब में

तीन आज़माई हुई स्क्रिप्ट — कॉपी कीजिए, WhatsApp पर भेजिए, या चौपाल में बोल दीजिए। हर शब्द दरवाज़े पर परखा हुआ है।

दरवाज़ा संवाद • 30 सेकंड

वोट नहीं, एक सवाल

नमस्ते! मैं जन सुराज से हूँ। वोट मांगने नहीं, एक सवाल पूछने आया हूँ — पिछले 30 साल में आपके घर से कितने लोग कमाने बाहर गए? जिस पार्टी को भी वोट दिया, क्या वह उन्हें वापस ला पाई? अगर अगली बार सरकार सिर्फ़ स्कूल, काम और पलायन पर परखी जाए, तो क्या एक मौका देंगे?

WhatsApp फॉरवर्ड

एक संदेश, सौ गांव

🌾 हर सुबह हमारे गांवों से बसें भरकर लोग परदेस जाते हैं। यह किस्मत नहीं — नीति की विफलता है। जन सुराज: सही लोग, सही सोच, सामूहिक प्रयास। इस बार वोट जाति पर नहीं, बच्चों के भविष्य पर। अपने पंचायत का समन्वयक खोजिए — jansuraaj पेज पर पिन कोड डालिए।

चौपाल की शुरुआत • 2 मिनट

पहले सवाल, फिर पार्टी

भाइयो-बहनो, हम पार्टी बाद में हैं — पहले एक सवाल हैं: हमारे बच्चे यहीं क्यों नहीं पढ़, कमा और रह सकते? 70 साल में हर पार्टी को आज़माया। इस बार व्यक्ति नहीं, व्यवस्था बदलने की बात है। पंचायत तय करेगी उम्मीदवार, पंचायत तय करेगी मुद्दे — और पाई-पाई का हिसाब सार्वजनिक होगा।

ऑफ़लाइन इवेंट लॉग

नेटवर्क नहीं है? चौपाल, सभा और घर-संपर्क फिर भी दर्ज कीजिए — फ़ोन में सुरक्षित रहेगा, नेटवर्क आते ही अपने-आप सिंक होगा। (लाइव संस्करण में PWA के रूप में)

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