चुनाव चिन्ह — स्कूल बैग
शुरुआत बिहार से — सवाल पूरे देश के भविष्य का।
70 वर्षों में जाति और धर्म के नाम पर वोट देकर हमने क्या पाया? अब वोट शिक्षा, रोज़गार और पलायन रोकने के नाम पर। यह सिर्फ़ चुनाव नहीं — यह व्यवस्था परिवर्तन का जन-आंदोलन है, जो अब उत्तर प्रदेश के गांवों तक पहुंच रहा है।
हर सफल जन-आंदोलन के चार स्तंभ: संदेशवाहक, संदेश, सिपाही और तंत्र। जन सुराज इन चारों को एक साथ खड़ा कर रहा है।
प्रशांत किशोर — जिन्होंने दो दशक दूसरों को सत्ता दिलाई, अब जनता के साथ पैदल खड़े हैं। लेकिन असली संदेशवाहक हर पंचायत का वह चेहरा है, जिस पर गांव पहले से भरोसा करता है।

संदेश वही टिकता है जो हर गांव के अपने दर्द से निकला हो। जन सुराज का पूरा घोषणापत्र तीन कसौटियों पर कसा जाता है:
हर बच्चे को वही स्कूल मिले, जो अफ़सर के बच्चे को मिलता है। स्कूल की गुणवत्ता ही असली आरक्षण है।
10–12 हज़ार की मजदूरी के लिए 1,500 किलोमीटर दूर क्यों? काम यहीं बनेगा — खेत से, हुनर से, उद्यम से।
पलायन नियति नहीं, नीति की विफलता है। जो राज्य मजदूर भेजता है, वह कभी मालिक नहीं बन पाता।
3,000+ किलोमीटर की पदयात्रा से निकले प्रशिक्षित सिपाही — हर गांव में चौपाल, हर पंचायत में टीम। ये पोस्टर चिपकाने वाले कार्यकर्ता नहीं, व्यवस्था बदलने वाले मिशनरी हैं।
आंदोलन जनता के पैसे से चलता है और जनता को ही हिसाब देता है। और नीति? वह दिल्ली में नहीं, गांव की रिपोर्ट से लिखी जाती है — हर जन-आवाज़ रिपोर्ट पंचायत प्रोफ़ाइल में जुड़ती है और नीति डेस्क तक पहुंचती है।
पिन कोड, ज़िला या प्रखंड लिखते ही आपके इलाके का समन्वयक सामने। कोई फ़ॉर्म नहीं, कोई इंतज़ार नहीं।
आपके पंचायत में जन सुराज की टीम अभी बन रही है। अपना नाम दीजिए — प्रखंड टीम 48 घंटे में संपर्क करेगी।
स्वयंसेवक के रूप में जुड़ें →⚠ यह डिज़ाइन-प्रोटोटाइप है — सभी समन्वयक नाम, फ़ोटो व नंबर नमूना (सैंपल) डेटा हैं। लाइव संस्करण में यह सूची केंद्रीय CRM से जुड़ेगी।
यह शिकायत-पेटी नहीं है। हर रिपोर्ट एक इंसान पढ़ता है, पंचायत प्रोफ़ाइल में दर्ज होती है, और घोषणापत्र की प्राथमिकता तय करती है।
खेत की मेड़ पर खड़े-खड़े, मोबाइल से 2 मिनट में — फ़ोटो और जगह के साथ।
हर रिपोर्ट को इंसान जांचता है — अफ़वाह छंटती है, तथ्य आगे बढ़ता है।
8,400+ पंचायतों का जीवित नक्शा — कौन-सी समस्या कहाँ, कितनी बार।
घोषणापत्र गांव की रिपोर्ट से लिखा जाता है — दिल्ली के सम्मेलन-कक्ष से नहीं।
जन सुराज जनता के पैसे से चलता है, इसलिए हिसाब भी जनता को ही देता है। यह कसौटी संस्थापक ने पहले खुद पर लागू की — चुनावी शपथ-पत्र में एक-एक रुपया, एक-एक संपत्ति घोषित।
स्रोत: फॉर्म-26 चुनावी शपथ-पत्र, 182-बांकीपुर (पटना), 13 जुलाई 2026 — पूरा शपथ-पत्र PDF पढ़ें
कुल व्यय का हिस्सा — हर मद पर प्रत्यक्ष लेबल, तिमाही फाइलिंग से मिलान
| तिमाही | घोषित सहयोग | फाइलिंग |
|---|---|---|
| Q1 FY27 | ₹1.42 करोड़ | PDF (नमूना) |
| Q4 FY26 | ₹1.18 करोड़ | PDF (नमूना) |
| Q3 FY26 | ₹0.97 करोड़ | PDF (नमूना) |
तीन आज़माई हुई स्क्रिप्ट — कॉपी कीजिए, WhatsApp पर भेजिए, या चौपाल में बोल दीजिए। हर शब्द दरवाज़े पर परखा हुआ है।
नमस्ते! मैं जन सुराज से हूँ। वोट मांगने नहीं, एक सवाल पूछने आया हूँ — पिछले 30 साल में आपके घर से कितने लोग कमाने बाहर गए? जिस पार्टी को भी वोट दिया, क्या वह उन्हें वापस ला पाई? अगर अगली बार सरकार सिर्फ़ स्कूल, काम और पलायन पर परखी जाए, तो क्या एक मौका देंगे?
🌾 हर सुबह हमारे गांवों से बसें भरकर लोग परदेस जाते हैं। यह किस्मत नहीं — नीति की विफलता है। जन सुराज: सही लोग, सही सोच, सामूहिक प्रयास। इस बार वोट जाति पर नहीं, बच्चों के भविष्य पर। अपने पंचायत का समन्वयक खोजिए — jansuraaj पेज पर पिन कोड डालिए।
भाइयो-बहनो, हम पार्टी बाद में हैं — पहले एक सवाल हैं: हमारे बच्चे यहीं क्यों नहीं पढ़, कमा और रह सकते? 70 साल में हर पार्टी को आज़माया। इस बार व्यक्ति नहीं, व्यवस्था बदलने की बात है। पंचायत तय करेगी उम्मीदवार, पंचायत तय करेगी मुद्दे — और पाई-पाई का हिसाब सार्वजनिक होगा।
नेटवर्क नहीं है? चौपाल, सभा और घर-संपर्क फिर भी दर्ज कीजिए — फ़ोन में सुरक्षित रहेगा, नेटवर्क आते ही अपने-आप सिंक होगा। (लाइव संस्करण में PWA के रूप में)
दरवाज़े की स्क्रिप्ट, WhatsApp फॉरवर्ड, चौपाल की बात — पूरा प्रचार टूलकिट एक जगह, ऑफ़लाइन भी।
टूलकिट खोलें →अपना पिन कोड डालिए — अपने पंचायत का समन्वयक, उसका नंबर और अपने इलाके के मुद्दे तुरंत देखिए।
पंचायत खोजें →चंदा नहीं, हिस्सेदारी। जनता के पैसे से चलने वाला आंदोलन, जो जनता को ही हिसाब देता है — लाइव बहीखाता देखिए।
पारदर्शी फंडिंग →